magar vo diya hi nahin maan kar ke | मगर वो दिया ही नहीं मान कर के

  - Ahmad Javaid
मगरवोदियाहीनहींमानकरके
बहुतहमनेदेखाहैजीजानकरके
कभीदिलकोभीसैरकरजाओसाहब
येग़ुंचाभीहैगागुलिस्तानकरके
नज़रइससरापेमेंसौजासेपलटी
ज़ुलेख़ाईयूसुफ़िस्तानकरके
वोजिसरोज़निकलेंजगउजियारनेको
येदिलभीदिखालाइयोध्यानकरके
जनाबआपहूरमलकहोंगेलेकिन
समझिएगा'आशिक़कोइंसानकरके
तिरीलाला-ज़ारीसलामतकिहमभी
खड़ेहैंकोईग़ुंचाअरमानकरके
मसीहख़िज़्रसर-ब-कफ़फिररहेहैं
कोईउसपेमरनाहैआसानकरके
मिरीकिश्त-ए-जाँपरसेगुज़राहै'जावेद'
सहाब-ए-जुनूँज़ोर-ए-बारानकरके
  - Ahmad Javaid
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