kitne men banti hai mohr aisi | कितने में बनती है मोहर ऐसी

  - Ahmad Javaid
कितनेमेंबनतीहैमोहरऐसी
ना-चीज़अहमद-जावेद-'उवैसी'
मेरेसुख़नमेंहैएकशयसी
आवाज़इतनीख़ामोशीऐसी
कलआशिक़ोंकाआतेहीमज़कूर
क्याक्याबहकेअल्लामा-क़ैसी
इसमंतिक़ीपरअपनीनज़रहै
मिन-वज्हऐसीमिन-वज्हवैसी
याँकाहोनाभीवहमहीहै
बुतलानकिसकातहक़ीक़कैसी
खुलतीनहींहैमुझपरयेदुनिया
दिलमेंनहींसीआँखोंमेंहैसी
जितनीमसाफ़तसरकरचुकाहूँ
लगतीहैवोभीना-कर्दातयसी
सूखापड़ाहैदरियातोकबका
हैमौज-ख़ेज़ीवैसीकीवैसी
अबशहरसाराग़र्क़ाबजानो
अश्कोंमेंआईयेबूँदकैसी
साग़रमिलाहैसाग़रसामुझको
उसमेंभरीहैमयकोईमयसी
देताहैतर्क-ए-दुनियाकीदावत
'जावेद'कीतोऐसी-की-तैसी
  - Ahmad Javaid
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