vo zamaana hai ki ab kuchh nahin deewane men | वो ज़माना है कि अब कुछ नहीं दीवाने में

  - Ahmad Ata
वोज़मानाहैकिअबकुछनहींदीवानेमें
नामलेताहैजुनूँकाकभीअनजानेमें
क़िस्मतअपनीहैकिहमनौहागरीकरतेहुए
करेंज़ंजीर-ज़नीदिलकेअज़ा-ख़ानेमें
क्याहुएलोगपुरानेजिन्हेंदेखाभीनहीं
ज़मानेहमेंताख़ीरहुईआनेमें
इनशिकस्तादर-ओ-दीवारकीसूरतहमभी
बहुतआसेब-ज़दाहोंगेनज़रआनेमें
अपनेआबाईमकानोंसेपलटतेहुएहम
कितनेनाज़ाँहैंकोईदिनरहेवीरानेमें
हमतोकुछऔरतरहहोतेथेबर्बाद'अता'
अबतोकुछऔरसेहालातहैंमय-ख़ानेमें
  - Ahmad Ata
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy