hui ghazal hi na kuchh baat ban saki ham se | हुई ग़ज़ल ही न कुछ बात बन सकी हम से

  - Ahmad Ata
हुईग़ज़लहीकुछबातबनसकीहमसे
येसरगुज़िश्त-ए-जुनूँकबबयाँहुईहमसे
सड़कपेबैठगएदेखतेहुएदुनिया
औरऐसेतर्कहुईएकख़ुद-कुशीहमसे
हमगएथेघनेबरगदोंकेसाएमें
सौबातकरनेचलीआईरौशनीहमसे
वोख़्वाबक्याथाकिजोभूलनेलगादम-ए-सुब्ह
वोरातकैसीथीजोरूठनेलगीहमसे
बुझाकेअपनेअलावपड़ाहमेंछुपना
तोयूँँकहानीफ़रामोशहोगईहमसे
हमआजफिरबड़ीताब-ओ-तवाँसेजुलतेहैं
फिरआजसहमतोजाएगीतीरगीहमसे
हमआजभीउसीदरवाज़ेकीबनेथेदर्ज़
वोबे-नियाज़उसीतरहफिरमिलीहमसे
  - Ahmad Ata
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