hamaari aañkhen bhi saahib ajeeb kitnii hain | हमारी आँखें भी साहिब अजीब कितनी हैं

  - Ahmad Ata
हमारीआँखेंभीसाहिबअजीबकितनीहैं
किदिलजोरोएतोकम-बख़्तहँसनेलगतीहैं
तुम्हारेशहरसचलिएकितंग-दस्तीने
तुम्हारेशहरकीगलियाँभीतंगकरदीहैं
येहमहैंबे-हुनराँदेखिएहुनर-मंदी
जोकोईकामकरेंहमतोपोरेंजलतीहैं
इसकावस्लमिलाऔररोज़गारयहाँ
सोपहलेहिज्र-ज़दाथेऔरअबकेहिज्रतीहैं
तोशाह-ज़ादीकोलाएँवोमहव-ए-ख़्वाबहैक्या
हमेंयक़ींनहींपरियाँभीझूटबोलतीहैं
  - Ahmad Ata
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