ye diya khun se jala phir bhi jala hai to sahi | ये दिया ख़ूँ से जला फिर भी जला है तो सही

  - Ahmad Adil
येदियाख़ूँसेजलाफिरभीजलाहैतोसही
लाखरस्मनहीमिलामुझसेमिलाहैतोसही
अन-कहीबातसमझलोतोबड़ीबातहैये
मेरीख़ामोशनवाईमेंसदाहैतोसही
डगमगातामुझेदेखेतोसहारादेकोई
येजोलग़्ज़िशहैतोलग़्ज़िशकामज़ाहैतोसही
भीगीआँखेंयेबतातीहैंकिसुनकरमिराहाल
कुछकुछतुझकोभीएहसासहुआहैतोसही
कहेंमग़रूरकोबदमस्तमगरसचयेहै
इंकिसारीमेंभीअपनाहीनशाहैतोसही
ज़िंदगीभरमिरीहस्तीमेंरचाहोजैसे
तुझकोदेखानहींमहसूसकियाहैतोसही
काविश-ए-ज़ीस्तहैक्याअपनीहीहस्तीकीतलाश
ख़ुदकोपालेनाहीइंसाँकासिलाहैतोसही
हैजोआज़ुर्दगीउसकीदम-ए-रुख़्सत'आदिल'
तुझकोअंदाज़ा-ए-तजदीद-ए-वफ़ाहैतोसही
  - Ahmad Adil
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