saaz-e-hasti pe abhii jhoom ke ga le mujh ko | साज़-ए-हस्ती पे अभी झूम के गा ले मुझ को

  - Ahmad Adil
साज़-ए-हस्तीपेअभीझूमकेगालेमुझको
ज़िंदगीसेयेकहोऔरटालेमुझको
मैंनेतोसुब्ह-ए-दरख़्शाँकीदु'आमाँगीथी
क्यूँँमिलेज़र्दचराग़ोंकेउजालेमुझको
तुझकोपानेकेलिएउमरगँवादीमैंने
हक़तोबनताहैकितूअपनाबनालेमुझको
येतोसाक़ीकीजगहऔरकोईबैठाहै
येजोगिनगिनकेपिलाताहैपियालेमुझको
मैंज़मानेकेझमेलोंमेंधँसाजाताहूँ
उससेकहिएकिवोदलदलसेनिकालेमुझको
अपनीख़ामोशतमन्नाकीअज़िय्यतसेनिकल
जोसुनानाहैज़राखुलकेसुनालेमुझको
ना-तवानीहीमिरीताब-ओ-तवाँहै'आदिल'
मैंनेकबतुझसेकहाथाकिबचालेमुझको
  - Ahmad Adil
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