dastoor tha jo gham ka puraana badal gaya | दस्तूर था जो ग़म का पुराना बदल गया

  - Ahmad Adil
दस्तूरथाजोग़मकापुरानाबदलगया
सँभलेथेअभीकिज़मानाबदलगया
शिकवानहींकिसाग़र-ओ-मीनाबदलगए
टूटाख़ुमारकैफ़-ए-शबानाबदलगया
जोबाबथेअहमअभीहोनेथेवोरक़म
परक्याकिलिखतेलिखतेफ़सानाबदलगया
मश्क़-ए-सुख़नवहीहैमशक़्क़तभीहैवही
कैसेकरूँँयक़ीनज़मानाबदलगया
नग़्मा-सराहैंहमतोउसीसुरमेंलयमेंहैं
परलोगकहरहेहैंतरानाबदलगया
क़ाएमपुरानेहीलोंबहानोंपेआजभी
समझेथेइसकातर्ज़बहानाबदलगया
मेरीथीक्यामजालहक़ीक़तबदलसकूँ
ख़ाकेतह-ए-ख़यालबनानाबदलगया
'आदिल'तुझेयक़ींनहींआयाआएगा
तेरावोयार-ए-ग़ारपुरानाबदलगया
  - Ahmad Adil
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