azal se be-sabaati ka gilaa tha | अज़ल से बे-सबाती का गिला था

  - Ahmad Adil
अज़लसेबे-सबातीकागिलाथा
मगरइंसानख़ुदकम-हौसलाथा
जिसेसमझेसमुंदरकीरवानी
सबील-ए-ज़िंदगीकाबुलबुलाथा
अजबसीथीमसाफ़ततीरगीकी
चलाथागिरपड़ाथाफिरचलाथा
हरइकलम्हारिफ़ाक़तकाहमारी
धनककेसातरंगोंसेसजाथा
तवाज़ुनथाज़रूरीज़िंदगीमें
तलव्वुनकामगरअपनामज़ाथा
खड़ाथामैंपशेमाँफिरवहींपर
जहाँसेलग़्ज़िशोंकासिलसिलाथा
कभीसोचाभी'आदिल'क्यूँँमिलासब
हुआहासिलवहीजोदेचुकाथा
  - Ahmad Adil
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