main bhi kya zabt aazmaata hooñ | मैं भी क्या ज़ब्त आज़माता हूँ

  - Ahmad Adil
मैंभीक्याज़ब्तआज़माताहूँ
तौबाकरताहूँभूलजाताहूँ
ग़मसारहताहूँतुझसेदूरीमें
औरक़ुर्बतमेंखोसाजाताहूँ
अपनीहस्तीकीअज़्मतेंअक्सर
इंकिसारीसेझुककेपाताहूँ
क्यूँँमुक़य्यदहूँज़ातमेंअपनी
जबकिदुनियासेदिललगाताहूँ
उसकीज़ुल्फ़ोंकोअबकेसुलझाकर
ख़ुदकोउलझाहुआसापाताहूँ
जानेवालेकोयेनहींमा'लूम
मैंतसव्वुरमेंउसकोलाताहूँ
ग़म-गुसारीमेंदोस्तकी'आदिल'
रंजसहताहूँमुस्कुराताहूँ
  - Ahmad Adil
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy