bas har ik raat yahii jurm kiya hai main ne | बस हर इक रात यही जुर्म किया है मैं ने

  - Ahmad Adil
बसहरइकरातयहीजुर्मकियाहैमैंने
लाकेख़्वाबोंमेंतुझेदेखलियाहैमैंने
हरबरसज़ीस्तकालम्हासालगाहैलेकिन
बाज़लम्होंमेंतोसदियोंकोजियाहैमैंने
छूटेजातेहैंसभीअहल-ए-ख़राबात-ए-जुनूँ
क्याअजबअक़्लसेसौदायेकियाहैमैंने
साग़र-ए-मर्गकोसुक़रातनेपीकरयेकहा
ज़िंदगीतेरेलिएज़हरपियाहैमैंने
अपनेहरख़्वाबकीता'बीरकोपानेकेलिए
इकसमुंदरथाजिसेपारकियाहैमैंने
तुमनहींजानतेमक़्तलसेडरानेवालो
जाँकानज़रानाकईबारदियाहैमैंने
कैसेमुमकिनहैकिमैंतुझसेतिरीबातकरूँँ
तेरेकहनेपेतोहोंटोंकोसियाहैमैंने
मय-कशीमेंभीकईदौरगुज़ारे'आदिल'
कभीचुल्लूकभीसाग़रसेपियाहैमैंने
  - Ahmad Adil
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