ham apne zakham sabhi ko dikha nahin sakte | हम अपने ज़ख़्म सभी को दिखा नहीं सकते

  - Ahmad Adil
हमअपनेज़ख़्मसभीकोदिखानहींसकते
जोशिकवातुमसेहैसबकोसुनानहींसकते
मिरेख़यालकीगहराईकोज़रासमझो
किसिर्फ़लफ़्ज़तोमतलबबतानहींसकते
मलालयेहैकिसाक़ीतोबनगएसाहब
शराबहाथमेंहैऔरपिलानहींसकते
अजबहैफूलकीफ़ितरतउसेमसलकरतुम
महकतेहाथोंकीख़ुश्बूछुपानहींसकते
लिखागयाजोमुक़द्दरमेंहर्फ़-ए-आख़िरहै
तुमअपनीमर्ज़ीसेइसकोमिटानहींसकते
हज़ारोंहीलेबहानेतराशलोफिरभी
तुमअपनेचेहरेकीख़िफ़्फ़तछुपानहींसकते
अबएकहमहैंकिसदियाँगुज़ारदें'आदिल'
औरएकवोहैंकिलम्हाबतानहींसकते
  - Ahmad Adil
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