masroof raahguzaar pe chala ja raha tha main | मसरूफ़ रहगुज़र पे चला जा रहा था मैं

  - Ahmad Adil
मसरूफ़रहगुज़रपेचलाजारहाथामैं
फिरक्यूँँलगाकिसबसेजुदाजारहाथामैं
ता'मीर-ए-ज़ातहीमेंलगीज़िंदगीतमाम
ख़ालिक़बनारहाथाबनाजारहाथामैं
हासिलथींजिनकोराहतेंवोभीफ़नाहुए
क्यूँँअपनीमुफ़्लिसीसेडराजारहाथामैं
दरिया-ए-ज़ीस्तकीयहीमंज़िलथीआख़िरी
इकबहर-ए-बे-कराँमेंगिराजारहाथामैं
समझाथाआइनेमेंमिराअक्सहीनहीं
ज़ाहिरथाऔरसबसेछुपाजारहाथामैं
पहलेतोकू-ए-यारकीफिरदारकीतलब
दलदलमेंख़्वाहिशोंकीधँसाजारहाथामैं
मैंगर्द-ए-राहथामगरए'जाज़देखिए
हरकारवाँकेसाथउड़ाजारहाथामैं
रुकनेमेंडरयेथाकितवाज़ुनबिगड़जाए
'आदिल'इसीगुमाँमेंचलाजारहाथामैं
  - Ahmad Adil
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