sau haath uthe karb ki khushboo ko churaane | सौ हाथ उठे कर्ब की ख़ुश्बू को चुराने

  - Afzal Minhas
सौहाथउठेकर्बकीख़ुश्बूकोचुराने
क्याज़ख़्मलगाएहैंमिरेतनपेहवाने
रस्तेमेंकोईपेड़जोमिलजाएतोबैठूँ
वोबारउठायाहैकिदिखनेलगेशाने
आँखोंमेंबसीथीतिरेचेहरेकीतमाज़त
चलनेदियाराहमेंज़ंजीर-ए-सदाने
चेहरेथेकिमरक़दकीतरहनौहा-ब-लबथे
क्याक्यारुलायामुझेमानूसफ़ज़ाने
नग़्मोंकेतआ'क़ुबमेंजाओकिअभीतक
इंसाँकोमुयस्सरहीनहींहोंटहिलाने
क्यूँँइतनेपरेशानहोउनवाँकीतलबमें
किरदारमुकम्मलहोतोबनतेहैंफ़साने
आँखोंकेझरोकोंसेकिसेढूँडरहेहो
हरनक़्शमिटाडालाहैसहराकीहवाने
दुनियामेंयहीसोचकेज़िंदाहूँमैं'अफ़ज़ल'
एहसासतोबख़्शाहैमुझेमेरेख़ुदाने
  - Afzal Minhas
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