mitte hue nuqoosh-e-wafa ko ubhaariye | मिटते हुए नुक़ूश-ए-वफ़ा को उभारिए

  - Afzal Minhas
मिटतेहुएनुक़ूश-ए-वफ़ाकोउभारिए
चेहरोंपेजोसजाहैमुलम्मा'उतारिए
मिलनाअगरनहींहैतोज़ख़्मोंसेफ़ाएदा
छुपकरमुझेख़यालकेपत्थरमारिए
कोईतोसरज़निशकेलिएआएइसतरफ़
बैठेहुएहैंदिलकेमकाँमेंजुवारिए
हाथोंपेनाचतीहैअभीमौतकीलकीर
जैसेभीहोयेज़ीस्तकीबाज़ीहारिए
शिकवाकीजिएअभीअपनेनसीबका
साँसोंकीतेज़आँचपेहरशबगुज़ारिए
मिस्मारहोगईहैंफ़लक-बोसचाहतें
शहर-ए-जफ़ासेअबमुझेयूँँपुकारिए
फूलोंसेताज़गीकीहरारतकोछीनकर
मौसमकेज़हरकेलिएगुलशनसँवारिए
रुस्वाइयोंकाहोगाअबसामनाकभी
जल्दीसेआरज़ूकोलहदमेंउतारिए
'अफ़ज़ल'येतीरगीकेमुसाफ़िरकहाँचले
जीचाहताहैइनपेकईचाँदमारिए
  - Afzal Minhas
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