karb ke shahar se nikle to ye manzar dekha | कर्ब के शहरस निकले तो ये मंज़र देखा

  - Afzal Minhas
कर्बकेशहरसनिकलेतोयेमंज़रदेखा
हमकोलोगोंनेबुलायाहमेंछूकरदेखा
वोजोबरसातमेंभीगातोनिगाहेंउट्ठीं
यूँँलगाहैकोईतुरशाहुआपत्थरदेखा
कोईसायाभीसह
मेंहुएघरसेनिकला
हमनेटूटीहुईदहलीज़कोअक्सरदेखा
सोचकापेड़जवाँहोकेबनाऐसारफ़ीक़
ज़ेहनकेक़दनेउसेअपनेबराबरदेखा
जबभीचाहाहैकिमलबूस-ए-वफ़ाकोछूलें
मिस्ल-ए-ख़ुशबूकोईउड़ताहुआपैकरदेखा
रक़्सकरतेहुएलम्होंकीज़बाँगुंगहुई
अपनेसीनेमेंजोउतराहुआख़ंजरदेखा
ज़िंदगीइतनीपरेशाँहैयेसोचाभीथा
उसकेअतराफ़मेंशोलोंकासमुंदरदेखा
रातभरख़ौफ़सेचटख़ेथेसहरकीख़ातिर
सुब्ह-दमख़ुदकोबिखरतेहुएदरपरदेखा
वोजोउड़तीहैसदादस्त-ए-वफ़ामें'अफ़ज़ल'
उसीमिट्टीमेंनिहाँदर्दकागौहरदेखा
  - Afzal Minhas
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