tadap raha tha main jis dard-e-la-dawa ke li.e | तड़प रहा था मैं जिस दर्द-ए-ला-दवा के लिए

  - Afzal Minhas
तड़परहाथामैंजिसदर्द-ए-ला-दवाकेलिए
वोमिलगयाहैमगरछीनलेख़ुदाकेलिए
मैंबूँदबूँदटपकताहूँअपनेहोंटोंपर
चलाथालेकेयेसरमायाकर्बलाकेलिए
फ़िशार-ए-ग़मनेमुझेचूरचूरकरडाला
किवाड़खोलदेसारेज़राहवाकेलिए
कटीहुईहैमिरेताज़ामौसमोंकीज़बाँ
कहाँसेलाऊँगाअल्फ़ाज़अबदु'आकेलिए
मिरीतलबनेमिरेहाथतोड़डालेहैं
बहुतकड़ाहैयेलम्हामिरीअनाकेलिए
कभीदरीचेसमुंदरकीसम्तखुलतेथे
तरसगयाहूँमगरअबखुलीफ़ज़ाकेलिए
मुझेख़बरहैझुकेगीतिरीनज़रकभी
बनीहैयेतोसिफ़तचश्म-ए-बा-हयाकेलिए
हरएकचीज़यहाँकाग़ज़ीलिबासमेंहै
कोईजगहनहींमिलतीगुल-ए-वफ़ाकेलिए
ख़यालमेंकईकाँटेउतरगए'अफ़ज़ल'
सज़ामिलीहैयेइकहर्फ़-ए-ना-रसाकेलिए
  - Afzal Minhas
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