der tak raat andhere men jo main ne dekha | देर तक रात अँधेरे में जो मैं ने देखा

  - Aftab Shamsi
देरतकरातअँधेरेमेंजोमैंनेदेखा
मुझसेबिछड़ेहुएइकशख़्सकाचेहराउभरा
क़स्मेंदेदेकेमिरेहाथोंनेमुझकोरोका
मैंनेदीवारसेकलनामजबउसकाखुर्चा
देखकरउसकोलगाजैसेकहींहोदेखा
यादबिल्कुलनहींआयामुझेघंटोंसोचा
मोम-बत्तीकोगलातारहाधीरेधीरे
रातअँधेरेकामिरेकमरेमेंबहतालावा
कितनेमग़्मूमग़ज़ालोंकाभरमरखताहै
नर्मकपड़ेसेतराशाहुआकालाबुर्क़ा
क़द्रअबहोकिहोज़ेहन-ए-रसाकीलेकिन
हीजाताहैकभीकामयेखोटासिक्का
सारेदिनमेरीतरहजलताहैऔरशामढले
हर-बुन-ए-मूसेलिपटजाताहैमेरासाया
अपनेहोंटोंपेसजालेताहूँमैंझूटीहँसी
अपनीपलकोंमेंछुपालेताहूँजलतादरिया
मानलोमेरीजोहैउसपेक़नाअ'तकरलो
अबनहींउतरेगाइसदुनियामेंमन्न-ओ-सल्वा
  - Aftab Shamsi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy