sabhi bichhad ga.e mujh se guzarte pal ki tarah | सभी बिछड़ गए मुझ से गुज़रते पल की तरह

  - Aftab Shamsi
सभीबिछड़गएमुझसेगुज़रतेपलकीतरह
मैंगिरचुकाहूँकिसीख़्वाबकेमहलकीतरह
नवाह-ए-जिस्ममेंरोता-कराहतादिन-रात
मुझेडराताहैकोईमिरीअजलकीतरह
येशहरहैयहाँअपनीहीजुस्तुजूमेंलोग
मिलेंगेचलतेहुएचि
यूँँटियोंकेदलकीतरह
मैंउससेमिलतारहाआजकीतवक़्क़ो'पर
वोमुझसेदूररहाआनेवालेकलकीतरह
नगरमेंज़ेहनकेफिरशामसेहैसन्नाटा
उदासउदासहैदिल'मीर'कीग़ज़लकीतरह
निढालदेखकेबिस्तरमेंनींदकीपरियाँ
फिरआजमुझसेख़फ़ाहोगईहैंकलकीतरह
  - Aftab Shamsi
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