joo-e-ravaan hooñ thehra samundar nahin hooñ main | जू-ए-रवाँ हूँ ठहरा समुंदर नहीं हूँ मैं

  - Aftab Shamsi
जू-ए-रवाँहूँठहरासमुंदरनहींहूँमैं
जोनस्बहोचुकाहोवोपत्थरनहींहूँमैं
सूरजकाक़हरदेखिएमुझपरकिआजतक
ख़ुदअपनेसाएकेभीबराबरनहींहूँमैं
मैंपिघलाजारहाहूँबदनकेअलावमें
औरकहरहाहूँमोमकापैकरनहींहूँमैं
मिट्टीसफ़रकीपैरोंमेंआँखोंमेंएकख़्वाब
ठहरूँकहाँकिमीलकापत्थरनहींहूँमैं
दिनभरकीभूकीप्यासीचलीरहीहैरात
किसदिलसेउज़्रकरदूँकिघरपरनहींहूँमैं
बूढ़ीरिवायतोंसेभरेएकशहरमें
यूँँबसगयाहूँजैसेकिबे-घरनहींहूँमैं
  - Aftab Shamsi
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