koi achchhii si ghazal kaanon men mere ghol de | कोई अच्छी सी ग़ज़ल कानों में मेरे घोल दे

  - Aftab Shamsi
कोईअच्छीसीग़ज़लकानोंमेंमेरेघोलदे
क़ैद-ए-तन्हाईमेंहूँमैंमुझकोकरखोलदे
येतनावजिस्मकाबढ़नेनहींदेगातुझे
चुस्तपैराहनमेंतूअपनेज़रासाझोलदे
एकलड़कीजलरहीहैचिलचिलातीधूपमें
कोईबादलकेउसपरअपनीछतरीखोलदे
राहतकतेजिस्मकीमज्लिसमेंसदियाँहोगईं
झाँककरअंधेकुएँमेंअबतोकोईबोलदे
मैंख़रीदार-ए-वफ़ाहूँतूगिरफ़्तार-ए-वफ़ा
मेरीबाँहोंमेंथिरकताजिस्मअपनातोलदे
देरतकबंजाराकलकोईसदादेतारहा
कौनहैबाज़ारमेंजोजिंस-ए-दिलकामोलदे
जानेकबसेफ़ैसलाक़िस्मतकासुननेकेलिए
मुंतज़िरबैठाहूँमैंतूअपनीमुट्ठीखोलदे
शे'रअच्छेहोंतोबे-गाएभीमिलजातीहैदाद
तूख़ुदारालहनकेहाथोंमेंमतकश्कोलदे
  - Aftab Shamsi
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