aseer-e-jism hooñ darwaaza tod dale koi | असीर-ए-जिस्म हूँ दरवाज़ा तोड़ डाले कोई

  - Aftab Shamsi
असीर-ए-जिस्महूँदरवाज़ातोड़डालेकोई
गिरापड़ाहूँकुएँमेंमुझेनिकालेकोई
मैंअपनेआपमेंउतराखड़ाहूँसदियोंसे
क़रीबकेमिरेमेरीथाहपालेकोई
मैंजंगलोंमेंदरिंदोंकेसाथरहतारहा
येख़ौफ़हैकिअबइंसाँकेखालेकोई
शिकस्ताकश्तीकेतख़्तेपेसोरहाहूँमैं
थपेड़ामौजोंकाकरमुझेजगालेकोई
दहान-ए-ज़ख़्मतलकखिंचकेचुकाहैअब
मैंमुंतज़िरहूँयेज़हराबचूसडालेकोई
ज़मीनप्यासीहैतनमेंलहूनहींबाक़ी
हमाराबोझबहुतकमहैअबउठालेकोई
यक़ींनहींहैकिसीकोमिरेबिखरनेका
कसीफ़ज़ेहनोंकेकरजाएसाफ़जालेकोई
  - Aftab Shamsi
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