vo aasmaañ ke darkhshinda raahiyo_n jaisa | वो आसमाँ के दरख़शिंदा राहियोँ जैसा

  - Aftab Iqbal Shamim
वोआसमाँकेदरख़शिंदाराहियोँजैसा
अँधेरीशबमेंसहरकीगवाहियोंजैसा
किरन-शुऊर,दिल-ए-जहलमेंउतारताजा
किवक़्तआनपड़ाहैतबाहियोंजैसा
फ़क़ीर-ए-फ़र्दा!तिरेनामसेमिलाहैहमें
येमुल्क-ए-ख़्वाब,तिरीबादशाहियोंजैसा
नियाज़-ओ-अर्ज़-ए-सुख़नसेकहाँफ़रोहोवे
ग़ुरूर-ओ-नाज़किहैकज-कुलाहियोंजैसा
कहाथाकिसनेकिशाख़-ए-नहीफ़सेफूटें
गुनाहहमसेहुआबे-गुनाहियोंजैसा
मिरीबरातकिसीअजनबीकालिख्खाहुआ
येहर्फ़हर्फ़नविश्तासियाहियोंजैसा
  - Aftab Iqbal Shamim
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