faseel-e-shehr-e-tamanna men dar banaate hue | फ़सील-ए-शहर-ए-तमन्ना में दर बनाते हुए

  - Aftab Hussain
फ़सील-ए-शहर-ए-तमन्नामेंदरबनातेहुए
येकौनदिलमेंदरआयाहैघरबनातेहुए
नशेब-ए-चश्म-ए-तमाशाबनागयामुझको
कहींबुलंदी-ए-अय्यामपरबनातेहुए
मैंक्याकहूँकिअभीकोईपेश-रफ़्तनहीं
गुज़ररहाहूँअभीरहगुज़रबनातेहुए
किसेख़बरहैकिकितनेनुजूमटूटगिरे
शब-ए-सियाहसेरंग-ए-सहरबनातेहुए
पतेकीबातभीमुँहसेनिकलहीजातीहै
कभीकभीकोईझूटीख़बरबनातेहुए
मगरयेदिलमिरायेताइर-ए-बहिश्तमिरा
उतरहीआयाकहींमुस्तक़रबनातेहुए
दिलोंकेबाबमेंक्यादख़्ल'आफ़्ताब-हुसैन'
सोबातफैलगईमुख़्तसरबनातेहुए
  - Aftab Hussain
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