kamii rakhta hooñ apne kaam ki takmeel men | कमी रखता हूँ अपने काम की तकमील में

  - Aftab Hussain
कमीरखताहूँअपनेकामकीतकमीलमें
मबादाआपखोजाऊँकहींतमसीलमें
बहुतशिद्दतरहीपहलेकनार-ए-चश्मतक
उमडआयाहैअबवोसैलरूद-ए-नीलमें
मकान-ए-जाँलरज़ताहैहवा-ए-हिज्रसे
चराग़-ए-यादकोरक्खेंगेकिसक़िंदीलमें
येघड़ियाँआहपेमुझसेगुरेज़ाँहैंअगर
तोफिरमैंक्यूँँरहूँगावक़्तकीतहवीलमें
अज़ाब-ए-बर्क़-ओ-बाराँथाअँधेरीरातथी
रवाँथींकश्तियाँकिसशानसेइसझीलमें
  - Aftab Hussain
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