nigaah ke li.e ik KHvaab bhi ghaneemat hai | निगाह के लिए इक ख़्वाब भी ग़नीमत है

  - Aftab Hussain
निगाहकेलिएइकख़्वाबभीग़नीमतहै
वोतीरगीहैकियेरौशनीग़नीमतहै
चलोकहींपेत'अल्लुक़कीकोईशक्लतोहो
किसीकेदिलमेंकिसीकीकमीग़नीमतहै
कमज़ियादापेइसरारक्याकियाजाए
हमारेदौरमेंइतनीसीभीग़नीमतहै
बदलरहेहैंज़मानेकेरंगक्याक्यादेख
नज़रउठाकियेनज़्ज़ारगीग़नीमतहै
जानेवक़्तकीगर्दिशदिखाएगीक्यारुख़
गुज़ररहीहैजोयेज़िंदगीग़नीमतहै
ग़म-ए-जहाँकेझमेलोंमेंआफ़्ताब'हुसैन'
ख़याल-ए-यारकीआसूदगीग़नीमतहै
  - Aftab Hussain
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy