jab safar se laut kar aane ki tayyaari hui | जब सफ़र से लौट कर आने की तय्यारी हुई

  - Aftab Hussain
जबसफ़रसेलौटकरआनेकीतय्यारीहुई
बे-तअल्लुक़थीजोशयवोभीबहुतप्यारीहुई
चारसाँसेंथींमगरसीनेकोबोझलकरगईं
दोक़दमकीयेमसाफ़तकिसक़दरभारीहुई
एकमंज़रहैकिआँखोंसेसरकताहीनहीं
एकसाअतहैकिसारीउम्रपरतारीहुई
इसतरहचालेंबदलताहूँबिसात-ए-दहरपर
जीतलूँगाजिसतरहयेज़िंदगीहारीहुई
किनतिलिस्मीरास्तोंमेंउम्रकाटी'आफ़्ताब'
जिसक़दरआसाँलगाउतनीहीदुश्वारीहुई
  - Aftab Hussain
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