har phool hai hawaon ke rukh par khila hua | हर फूल है हवाओं के रुख़ पर खिला हुआ

  - Aftab Hussain
हरफूलहैहवाओंकेरुख़परखिलाहुआ
औरमेंहूँअपनेख़्वाबकेअंदरखिलाहुआ
येमैंजोरातदिननहींअपनेहवासेमें
वोबाग़हैज़रूरकहींपरखिलाहुआ
कुछमेरेसरकोभीथीमहकसीचढ़ीहुई
कुछवोभीसामनेथाबराबरखिलाहुआ
ख़्वाबोंमेंख़ुशबुएँसीख़यालोंमेंरंगसे
येबाग़होअगरकहींबाहरखिलाहुआ
किनमंज़रोंमेंमुझकोमहकनाथा'आफ़्ताब'
किसरेगज़ारपरहूँमैंकरखिलाहुआ
  - Aftab Hussain
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