ga.e manzaron se ye kya uda hai nigaah men | गए मंज़रों से ये क्या उड़ा है निगाह में

  - Aftab Hussain
गएमंज़रोंसेयेक्याउड़ाहैनिगाहमें
कोईअक्सहैकिग़ुबारसाहैनिगाहमें
हमा-वक़्तअपनीशबीहकेहूँमैंरू-ब-रू
कोईअश्कहैकियेआईनाहैनिगाहमें
कोईशहर-ए-ख़्वाबगुज़ररहाहैख़यालसे
कोईदश्त-ए-शामसुलगरहाहैनिगाहमें
कफ़-ए-दर्दसेग़म-ए-काएनातकीगर्दसे
वहीमिटरहाहैजोनक़्शसाहैनिगाहमें
कोईतीरगीहैफ़ुरात-ए-जाँमेंरवाँ-दवाँ
मगरइकचराग़सातैरताहैनिगाहमें
गएमौसमोंकीवोसब्ज़रंगहिकायतें
कोईआब-ए-सुर्ख़सेलिखगयाहैनिगाहमें
  - Aftab Hussain
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy