usii tarah ke shab-o-roz hain vahii duniya | उसी तरह के शब-ओ-रोज़ हैं वही दुनिया

  - Aftab Hussain
उसीतरहकेशब-ओ-रोज़हैंवहीदुनिया
पुरानीख़ाकपेता'मीरहैनईदुनिया
मैंअपनेआपमेंगुमथामुझेख़बरहुई
गुज़ररहीथीमुझेरौंदतीहुईदुनिया
हरआदमीकोयेदुनियाबदलकेरखदेगी
बदलसकाअगरअबभीआदमीदुनिया
नईहवाकोमददकेलिएपुकारतीहै
ख़ुदअपनीआगमेंजलतीहुईनईदुनिया
मैंजिसहवालेसेदुनियापेग़ौरकरताहूँ
उसीतरहसेकभीकाशसोचतीदुनिया
मैंअपनेअस्लकीजानिबरवाँ-दवाँहूँऔर
बुलारहीहैमुसलसलमुझेमिरीदुनिया
  - Aftab Hussain
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy