'aashiq the shahar men jo purane sharaab ke | 'आशिक़ थे शहर में जो पुराने शराब के

  - Adil Mansuri
'आशिक़थेशहरमेंजोपुरानेशराबके
हैंउनकेदिलमेंवसवसेअबएहतिसाबके
वोजोतुम्हारेहाथसेकरनिकलगया
हमभीक़तीलहैंउसीख़ाना-ख़राबके
फूलोंकीसेजपरज़राआरामक्याकिया
उसगुल-बदनपेनक़्शउठआएगुलाबके
सोएतोदिलमेंएकजहाँजागनेलगा
जागेतोअपनीआँखमेंजालेथेख़्वाबके
बसतिश्नगीकीआँखसेदेखाकरोउन्हें
दरियारवाँ-दवाँहैंचमकतेसराबके
किसतरहजमाकीजिएअबअपनेआपको
काग़ज़बिखररहेहैंपुरानीकिताबके
  - Adil Mansuri
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