chaaron taraf se maut ne ghera hai zeest ko | चारों तरफ़ से मौत ने घेरा है ज़ीस्त को

  - Adil Mansuri
चारोंतरफ़सेमौतनेघेराहैज़ीस्तको
औरउसकेसाथहुक्मकिअबज़िंदगीकरो
बाहरगलीमेंशोरहैबरसातकासुनो
कुंडीलगाकेआजतोघरमेंपड़ेरहो
छोड़आएकिसकीछतपेजवाँ-सालचाँदको
ख़ामोशकिसलिएहोसितारोजवाबदो
क्यूँँचलतेचलतेरुकगएवीरानरास्तो
तन्हाहूँआजमैंज़राघरतकतोसाथदो
जिसनेभीमुड़केदेखावोपत्थरकाहोगया
नज़रेंझुकाएदोस्तोचुपचुपचलेचलो
अल्लाहरक्खेतेरीसहरजैसीकम-सिनी
दिलकाँपताहैजबभीतूआतीहैशामको
वीराँचमनपेरोईहैशबनमतमामरात
ऐसेमेंकोईनन्हीकलीमुस्कुराएतो
'आदिल'हवाएँकबसेभीदेतीहैंदस्तकें
जल्दीसेउठकेकमरेकादरवाज़ाखोलदो
  - Adil Mansuri
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