hone ko yuñ to shahar men apna makaan tha | होने को यूँँ तो शहर में अपना मकान था

  - Adil Mansuri
होनेकोयूँँतोशहरमेंअपनामकानथा
नफ़रतकारेगज़ारमगरदरमियानथा
लम्हेकेटूटनेकीसदासुनरहाथामैं
झपकीजोआँखसरपेनयाआसमानथा
कहनेकोहाथबाँधेखड़ेथेनमाज़में
पूछोतोदूसरीहीतरफ़अपनाध्यानथा
अल्लाहजानेकिसपेअकड़ताथारातदिन
कुछभीनहींथाफिरभीबड़ाबद-ज़बानथा
शोलेउगलतेतीरबरसतेथेचर्ख़से
सायाथापासमेंकोईसाएबानथा
सबसेकियाहैवस्लकावा'दाअलगअलग
कलरातवोसभीपेबहुतमेहरबानथा
मुँह-फटथाबे-लगामथारुस्वाथाढीटथा
जैसाभीथावोदोस्तोमहफ़िलकीजानथा
  - Adil Mansuri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy