kuchh log kal musheer kii baaton men aa ga.e | कुछ लोग कल मुशीर की बातों में आ गए

  - Prashant Kumar
कुछलोगकलमुशीरकीबातोंमेंगए
जोज़हरकेगिलासमेंसहबापिलागए
इसमुल्ककेवज़ीरहीकुर्सीकीचाहमें
हिंदूकेसाथमुर्ग़-ए-हरमकोभिड़ागए
वोझोपड़ेमेंकलकोईख़ंजरलिएहुए
आएतोक़त्ल-ए-आमकोपरगुलखिलागए
ऐसातिरेलिबासमेंक्याहैछुपाहुआ
जोमुंसिफ़ोंकेसाथफ़रिश्तेभीगए
जिनकोवतनसेप्यारहैवोदूरबैठेहैं
जिनकोवतनसेबैरथावोजाँलुटागए
वोक़ैदकरलिएगएअहल-ए-क़लमसभी
जिसजिसकाजोख़ुलूसक़लमसेसुनागए
हमसेेजिन्हेंहैइश्क़वोतोदूरबैठेहैं
हमसेेजिन्हेंथाबैरवोसबजाँलुटागए
इतनेख़राबलोगहैंतेरेदयारमें
जलसादिखानेलाएथेमातमदिखागए
  - Prashant Kumar
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