rotiyaan milti rahen do ki ji.e jaayenge | रोटियाँ मिलती रहें दो कि जिए जाएँगे

  - Prashant Kumar
रोटियाँमिलतीरहेंदोकिजिएजाएँगे
क्यूँँकमाकेरखेंक्यासाथलिएजाएँगे
ज़हरठर्रामय-ए-गुलफ़ामयापानीकुछहो
जोमोहब्बतसेपिलाओगेपिएजाएँगे
अबकेबंदूकयातोपोंसेनहींहोगीजंग
जितनेखातेहैंसभीहैककिएजाएँगे
पापयापुण्ययाधनजोभीकमायाअबतक
साथलेजाएँगेयातुमकोदिएजाएँगे
जानतेतोनहींहोकौनमगरफिरभीतुम
कहींभटकोगेअगरसाथलिएजाएँगे
  - Prashant Kumar
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