rukhsaar la-jawaab hai kya nau-bahaar hai | रुख़सार ला-जवाब है क्या नौ-बहार है

  - Prashant Kumar
रुख़सारला-जवाबहैक्यानौ-बहारहै
बढ़करख़ुदासकौनयहाँहुस्न-कारहै
बेरोज़गारबैठेहैंऔरक्याकरेंबता
तानेहीसुनरहेहैंयहीरोज़गारहै
कितनीदफ़ाकहाथामिरीबातमानले
अबक्यूँँयेकहरहाहैकिदिलबे-क़रारहै
बज़्म-ए-सुख़नमेंबोलेख़ुदा-ए-सुख़नकाताज
तेरीसुख़नवरीपेहमारानिसारहै
क्यादोषदेंकिसीकोहैहममेंहीखोटजब
अपनाहीदिलसभीकारहाग़म-गुसारहै
अबफिररहेहैंमारेलताड़ेजहाँ-तहाँ
अबहरकिसीकोदेखमिराइंतिज़ारहै
देखोतोकैसेघूररहाशख़्सवोमुझे
लगताहैउसपरआजकोईधुनसवारहै
वा'दा-वफ़ाहैकितनायहीदेखतेहैंचल
अबशाम-ए-उम्रतकतिराहीइंतिज़ारहै
घररोटियाँहीतोड़रहेआजकल'प्रशांत'
येहरकिसीकेबसकानहींरोज़गारहै
  - Prashant Kumar
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