chori chori chhat pe jo raat men tum aaoge | चोरी चोरी छत पे जो रात में तुम आओगे

  - Prashant Kumar
चोरीचोरीछतपेजोरातमेंतुमआओगे
जाँघपरहवाकरकेसोचलोसुलाओगे
आरज़ूतोहैदिलकीशहरछोड़जाएँपर
चिड़चिड़ाकेतुमहमपेउँगलियाँउठाओगे
यारक्याबताएँवोइतनेख़ूब-सूरतहैं
एकबारदेखोगेसबकोभूलजाओगे
रातढलचुकीकबकीदिननिकलनेवालाहै
यारतुमदुपट्टेकोऔरकबउठाओगे
अबतुम्हींकोदेखेंगेरोज़छतपेआकरहम
यूँँमटकमटककेतुमझाड़ूजोलगाओगे
अबशराबपीकरहमइसअदामेंआएँगे
तुमबसअपनेदाँतोंमेंउँगलियाँदबाओगे
यूँँबनाकेआएँगेवेशज़ालिमाकाहम
देखतेहीखिड़कीपरतुमतोखेलजाओगे
जबकहींमुहल्लेमेंहमनज़रआएँगे
फिरख़ुदासलड़नेकोमस्जिदोंमेंजाओगे
दिल-जलोंकीमहफ़िलमेंआनाजानाछोड़ोतुम
वरनाफिरख़ुदाकेभीहाथमेंआओगे
हुस्न-ए-ख़ुदनिगरसोतोयूँँनिखरकेआएगा
आइनेमेंदेखोगेऔरमुस्कुराओगे
  - Prashant Kumar
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