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Aatish Indori
kab main yaaron sharaab peeta hooñ
kab main yaaron sharaab peeta hooñ | कब मैं यारों शराब पीता हूँ
- Aatish Indori
कब
मैं
यारों
शराब
पीता
हूँ
मैं
तो
जन्नत
का
आब
पीता
हूँ
- Aatish Indori
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झुके
तो
जन्नत
उठे
तो
ख़ंजर
करेंगी
हम
को
तबाह
आँखें
Parul Singh "Noor"
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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शब
बसर
करनी
है,
महफ़ूज़
ठिकाना
है
कोई
कोई
जंगल
है
यहाँ
पास
में
?
सहरा
है
कोई
?
Umair Najmi
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मिरे
माँ
बाप
जन्नत
से
नज़र
रखते
हैं
मुझ
पर
अब
मिरे
दिल
में
यतीमों
के
लिए
इक
ख़ास
कोना
है
Amaan Pathan
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मुहब्बत
आपसे
करना
कभी
आसाँ
नहीं
था
पर
बिना
कश्ती
के
दरिया
पार
करना
शौक़
है
मेरा
Tanoj Dadhich
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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करती
है
तो
करने
दे
हवाओं
को
शरारत
मौसम
का
तकाज़ा
है
कि
बालों
को
खुला
छोड़
Abrar Kashif
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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मैं
सालों
बाद
जब
भी
गाँव
जाता
हूँ
लिए
पीपल
की
ठंडी
छाँव
जाता
हूँ
कहीं
मैली
न
हो
जाए
ये
जन्नत
मैं
माँ
के
पास
नंगे
पाँव
जाता
हूँ
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Ashok Sagar
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फूल
जब
कुछ
किताब
से
निकले
ढेर
लम्हे
गुलाब
से
निकले
जिस्म
निकला
है
निकली
हैं
साँसें
हम
कहाँ
तेरे
ख़्वाब
से
निकले
ज़िंदगानी
की
झील
में
झाँका
ढेर
किरदार
आब
से
निकले
पूछ
कर
लग
रहा
है
ग़लती
की
प्रश्न
ढेरों
जवाब
से
निकले
इस
तरह
मेरी
मौत
को
टाला
धीरे
धीरे
नक़ाब
से
निकले
इक
नज़र
आपकी
गिरी
मुझ
पर
रात
दिन
सारे
ख़्वाब
से
निकले
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Aatish Indori
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बहुत
कर
ली
हैं
हमने
फ़ोन
पे
बातें
चले
आओ
ललितपुर
मिल
मिला
लेंगे
Aatish Indori
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गाँव
की
पहचान
थी
जो
वो
कँगूरा
काट
डाला
पथ
में
रोड़ा
डाल
थी
पर
पेड़
पूरा
काट
डाला
Aatish Indori
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करो
कोशिश
तो
ख़यालात
बदल
जाएँगे
और
ये
बदले
तो
हालात
बदल
जाएँगे
Aatish Indori
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आब
भर
के
ही
अगर
पीना
था
पैमाने
में
घर
पे
रुकना
था
नहीं
आना
था
मैख़ाने
में
Aatish Indori
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