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Aatish Indori
aab bhar ke hi agar peena tha paimaane men
aab bhar ke hi agar peena tha paimaane men | आब भर के ही अगर पीना था पैमाने में
- Aatish Indori
आब
भर
के
ही
अगर
पीना
था
पैमाने
में
घर
पे
रुकना
था
नहीं
आना
था
मैख़ाने
में
- Aatish Indori
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अभी
ज़िंदा
है
माँ
मेरी
मुझे
कुछ
भी
नहीं
होगा
मैं
घर
से
जब
निकलता
हूँ
दु'आ
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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इश्क़
कहता
है
भटकते
रहिए
और
तुम
कहते
हो
घर
जाना
है
Madan Mohan Danish
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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इक
दिए
से
एक
कमरा
भी
बहुत
है
दिल
जलाने
से
ये
घर
रौशन
हुआ
है
Neeraj Neer
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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उस
को
रुख़्सत
तो
किया
था
मुझे
मालूम
न
था
सारा
घर
ले
गया
घर
छोड़
के
जाने
वाला
Nida Fazli
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नताएज
जब
सर-ए-महशर
मिलेंगे
मोहब्बत
के
अलग
नंबर
मिलेंगे
तुम्हारी
मेज़बानी
के
बहाने
कोई
दिन
हम
भी
अपने
घर
मिलेंगे
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Khurram Afaq
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चराग़
घर
का
हो
महफ़िल
का
हो
कि
मंदिर
का
हवा
के
पास
कोई
मसलहत
नहीं
होती
Waseem Barelvi
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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कुछ
नहीं
कहती
हो
पर
ठीक
नहीं
था
सोनम
यार
का
मछली
पकड़ना
मेरा
चारा
बनना
Aatish Indori
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डर
अपने
बता
दूँ
तो
तुम
पक्का
डर
जाओगे
मैं
फिर
भी
हूँ
ज़िंदा
मगर
तुम
तो
मर
जाओगे
Aatish Indori
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जश्न
की
वजह
यार
देता
हूँ
हौसला
हूँ
बहार
देता
हूँ
हाँ
तेरा
इंतिज़ार
कर
लूँगा
यूँँ
ही
घंटों
गुज़ार
देता
हूँ
जब
भी
तन्हा
हो
तो
चले
आना
वक़्त
अपना
उधार
देता
हूँ
जिस्म
तक
बात
रखनी
है
ओके
तो
मुखौटा
उतार
देता
हूँ
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Aatish Indori
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लगता
यूँँ
है
कि
घर
गए
हो
तुम
कैसे
मानूँ
कि
मर
गए
हो
तुम
Aatish Indori
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मोहब्बत
ने
मुझे
औक़ात
दिखला
दी
ज़रूरी
क्यूँँ
है
धन
ये
बात
सिखला
दी
Aatish Indori
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