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Aatish Indori
jashn ki wajah yaar deta hooñ
jashn ki wajah yaar deta hooñ | जश्न की वजह यार देता हूँ
- Aatish Indori
जश्न
की
वजह
यार
देता
हूँ
हौसला
हूँ
बहार
देता
हूँ
हाँ
तेरा
इंतिज़ार
कर
लूँगा
यूँँ
ही
घंटों
गुज़ार
देता
हूँ
जब
भी
तन्हा
हो
तो
चले
आना
वक़्त
अपना
उधार
देता
हूँ
जिस्म
तक
बात
रखनी
है
ओके
तो
मुखौटा
उतार
देता
हूँ
- Aatish Indori
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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इश्क़
में
ख़ुद-कुशी
नहीं
करते
इश्क़
में
इंतिज़ार
करते
हैं
Rajesh Reddy
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कोई
इशारा
दिलासा
न
कोई
वा'दा
मगर
जब
आई
शाम
तिरा
इंतिज़ार
करने
लगे
Waseem Barelvi
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उम्र-ए-दराज़
माँग
के
लाई
थी
चार
दिन
दो
आरज़ू
में
कट
गए
दो
इंतिज़ार
में
Seemab Akbarabadi
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मैं
बहुत
जल्द
लौट
आऊँगा
तुम
मिरा
इंतिज़ार
मत
करना
Liaqat Jafri
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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ये
न
थी
हमारी
क़िस्मत
कि
विसाल-ए-यार
होता
अगर
और
जीते
रहते
यही
इंतिज़ार
होता
Mirza Ghalib
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ये
दाग़
दाग़
उजाला
ये
शब-गज़ीदा
सहर
वो
इंतिज़ार
था
जिस
का
ये
वो
सहर
तो
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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इक
उम्र
कट
गई
है
तिरे
इंतिज़ार
में
ऐसे
भी
हैं
कि
कट
न
सकी
जिन
से
एक
रात
Firaq Gorakhpuri
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जानता
है
कि
वो
न
आएँगे
फिर
भी
मसरूफ़-ए-इंतिज़ार
है
दिल
Faiz Ahmad Faiz
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शाम
को
रोज़
बुलंदी
से
उतर
आते
हैं
जो
परिंदे
हैं
वो
तो
लौट
के
घर
आते
हैं
उम्र
भर
साथ
निभाने
को
कोई
कहता
है
तब
मुहब्बत
में
अगर
और
मगर
आते
हैं
उनको
व्यापार
ही
व्यापार
नज़र
आता
है
लोग
जो
जिस्म
की
गलियों
से
गुज़र
आते
हैं
बे-वफ़ाओं
की
बताता
हूँ
अनूठी
पहचान
वे
ज़ियादा
ही
वफ़ादार
नज़र
आते
हैं
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Aatish Indori
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दुश्मनों
को
मुआ'फ़
कर
डाला
मन
से
सारे
मलाल
तब
निकले
ध्यान
में
उतरा
तो
हुआ
मंथन
मन
से
गंदे
ख़याल
तब
निकले
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Aatish Indori
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ख़ुद
चलो
रास्ता
नहीं
चलता
इश्क़
में
पैंतरा
नहीं
चलता
जिसको
जाना
है
वो
तो
जाएगा
इश्क़
का
वास्ता
नहीं
चलता
देखिए
इश्क़
एक
जंगल
है
रास्तों
का
पता
नहीं
चलता
एक
लम्बा
समय
गुज़रने
दो
चार
दिन
में
पता
नहीं
चलता
गाँव
को
अब
महानगर
समझो
हादसों
का
पता
नहीं
चलता
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Aatish Indori
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कुछ
तो
दिक़्क़त
है
ज़िंदगी
के
साथ
वरना
दुख
आते
क्यूँ
ख़ुशी
के
साथ
फूल
ने
मुझको
यह
नसीहत
दी
ज़िंदगी
जीना
बेख़ुदी
के
साथ
वक़्त
को
साँस
लेने
देता
हूँ
नहीं
चलता
हूँ
मैं
घड़ी
के
साथ
यार
मेरे
लिए
ये
मुश्किल
है
ज़िंदगी
जीना
बेदिली
के
साथ
चाहता
था
विराट
हो
जाना
इसलिए
चल
पड़ा
नदी
के
साथ
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Aatish Indori
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आपका
फ़ोन
व्यस्त
आता
है
फ़ोन
पर
किस
से
बात
करती
हो
Aatish Indori
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