hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Aatish Indori
gaav ki pahchaan thii jo vo kangura kaat daala
gaav ki pahchaan thii jo vo kangura kaat daala | गाँव की पहचान थी जो वो कँगूरा काट डाला
- Aatish Indori
गाँव
की
पहचान
थी
जो
वो
कँगूरा
काट
डाला
पथ
में
रोड़ा
डाल
थी
पर
पेड़
पूरा
काट
डाला
- Aatish Indori
Download Sher Image
ये
सोच
के
माँ
बाप
की
ख़िदमत
में
लगा
हूँ
इस
पेड़
का
साया
मिरे
बच्चों
को
मिलेगा
Munawwar Rana
Send
Download Image
77 Likes
धूप
तो
धूप
ही
है
इसकी
शिकायत
कैसी
अब
की
बरसात
में
कुछ
पेड़
लगाना
साहब
Nida Fazli
Send
Download Image
49 Likes
आप
जिस
चीज़
को
कहते
हैं
कि
बेहोशी
है
वो
दिमाग़ों
में
ज़रा
देर
की
ख़ामोशी
है
सूखते
पेड़
से
पंछी
का
जुदा
हो
जाना
ख़ुद-परस्ती
नहीं
एहसान-फ़रामोशी
है
Read Full
Ashu Mishra
Send
Download Image
38 Likes
तुमको
फ़िराक-ए-यार
ने
मिस्मार
कर
दिया
मुझको
फ़िराक-ए-यार
ने
फ़नकार
कर
दिया
गुल
से
मुतालिबा
जो
किया
बोसे
का
शजर
गुल
ने
हिला
के
पत्तियाँ
इनकार
कर
दिया
Read Full
Shajar Abbas
Send
Download Image
1 Like
लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
Read Full
Shajar Abbas
Send
Download Image
1 Like
परिंद
क्यूँँ
मिरी
शाख़ों
से
ख़ौफ़
खाते
हैं
कि
इक
दरख़्त
हूँ
और
साया-दार
मैं
भी
हूँ
Asad Badayuni
Send
Download Image
23 Likes
हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
Send
Download Image
31 Likes
रुकें
तो
धूप
से
नज़रें
बचाते
रहते
हैं
चलें
तो
कितने
दरख़्त
आते
जाते
रहते
हैं
Charagh Sharma
Send
Download Image
27 Likes
एक
पत्ता
शजर-ए-उम्र
से
लो
और
गिरा
लोग
कहते
हैं
मुबारक
हो
नया
साल
तुम्हें
Unknown
Send
Download Image
34 Likes
इक
मुहब्बत
से
भरी
उस
ज़िंदगी
के
ख़्वाब
हैं
पेड़
दरिया
और
पंछी
तेरे
मेरे
ख़्वाब
हैं
Neeraj Nainkwal
Send
Download Image
3 Likes
Read More
मोहब्बत
ने
मुझे
औक़ात
दिखला
दी
ज़रूरी
क्यूँँ
है
धन
ये
बात
सिखला
दी
Aatish Indori
Send
Download Image
0 Likes
वज्ह
क्या
है
जो
किया
तुमने
ख़सारा
देखता
हूँ
इसलिए
पति
को
तेरे
तुम
सेे
ज़ियादा
देखता
हूँ
Aatish Indori
Send
Download Image
2 Likes
कब
मैं
यारों
शराब
पीता
हूँ
मैं
तो
जन्नत
का
आब
पीता
हूँ
Aatish Indori
Send
Download Image
2 Likes
अच्छे
से
यार
देखना
है
तुम्हें
आख़िरी
बार
देखना
है
तुम्हें
हर
कोई
कहता
है
तुम्हें
तितली
बन
के
गुल
यार
देखना
है
तुम्हें
तोड़
दूँ
आँसुओं
की
हद-बंदी
दर्द
का
ज्वार
देखना
है
तुम्हें
हाँ
न
कुछ
भी
नहीं
कहोगे
तुम
पूरा
बाज़ार
देखना
है
तुम्हें
आया
कैसे
हूँ
देखते
यह
हो
मेरा
मेयार
देखना
है
तुम्हें
आतिश
इंदौरी
Read Full
Aatish Indori
Download Image
1 Like
फ़ोन
पर
तब
तो
बात
होती
थी
तेरे
चुम्बन
से
रात
होती
थी
तुम
तो
माहिर
थे
खेल
में
जानाँ
मेरी
हर
बार
मात
होती
थी
दिल
को
ख़त
में
उकेर
पाते
थे
तब
क़लम
और
दवात
होती
थी
याद
है
जब
क़रीब
थे
हम
तुम
रात
के
बाद
रात
होती
थी
आतिश
इंदौरी
Read Full
Aatish Indori
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Bimari Shayari
Life Shayari
Wafa Shayari
Khwaahish Shayari
Eid Shayari