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Aatish Indori
achchhe se yaar dekhna hai tumhein
achchhe se yaar dekhna hai tumhein | अच्छे से यार देखना है तुम्हें
- Aatish Indori
अच्छे
से
यार
देखना
है
तुम्हें
आख़िरी
बार
देखना
है
तुम्हें
हर
कोई
कहता
है
तुम्हें
तितली
बन
के
गुल
यार
देखना
है
तुम्हें
तोड़
दूँ
आँसुओं
की
हद-बंदी
दर्द
का
ज्वार
देखना
है
तुम्हें
हाँ
न
कुछ
भी
नहीं
कहोगे
तुम
पूरा
बाज़ार
देखना
है
तुम्हें
आया
कैसे
हूँ
देखते
यह
हो
मेरा
मेयार
देखना
है
तुम्हें
आतिश
इंदौरी
- Aatish Indori
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तुझे
छूकर
अभी
तक
होश
में
हूँ
कमी
कोई
कहीं
तो
रह
गई
है
Abhay Mishra
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मुझ
को
बीमार
करेगी
तिरी
आदत
इक
दिन
और
फिर
तुझ
से
भी
अच्छा
नहीं
हो
पाऊँगा
Rahul Jha
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ये
आग
वाग
का
दरिया
तो
खेल
था
हम
को
जो
सच
कहें
तो
बड़ा
इम्तिहान
आँसू
हैं
Abhishek shukla
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शिकारी
से
बचने
में
कैसा
कमाल
निशाने
पे
रहना
बड़ी
बात
है
Shariq Kaifi
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उतर
कर
आसमानों
से
ज़मीं
की
ख़ाक
पर
बैठो
ख़ुदा
ने
सब
सेे
ऊँची
आपको
मसनद
अता
की
है
Pawan mahabodhi
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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कई
शे'र
पढ़
कर
है
ये
बात
जानी
कोई
शे'र
उसके
मुक़ाबिल
नहीं
है
Alankrat Srivastava
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बस
ये
हुआ
कि
उस
ने
तकल्लुफ़
से
बात
की
और
हम
ने
रोते
रोते
दुपट्टे
भिगो
लिए
Parveen Shakir
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शब
भर
इक
आवाज़
बनाई
सुब्ह
हुई
तो
चीख़
पड़े
रोज़
का
इक
मामूल
है
अब
तो
ख़्वाब-ज़दा
हम
लोगों
का
Abhishek shukla
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ज़िक्र
तुम्हारा
बहुत
ज़रूरी
इन
ग़ज़लों
में
जानेमन
चाय
बिना
अदरक
को
डाले
अच्छी
थोड़ी
बनती
है
Tanoj Dadhich
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भला
कब
मैं
निशाने
पर
नहीं
आया
मेरे
हाथों
में
पर
पत्थर
नहीं
आया
मैं
तौबा
दोस्ती
से
कर
तो
लूँ
लेकिन
हमेशा
पीठ
पे
ख़ंजर
नहीं
आया
कहीं
ठहरे
नहीं
फिर
भी
शिकायत
है
सफ़र
में
ख़ुशनुमा
मंज़र
नहीं
आया
निभाई
है
मुहब्बत
उम्र
भर
आतिश
मुहब्बत
में
कभी
अंतर
नहीं
आया
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Aatish Indori
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गाँव
की
पहचान
थी
जो
वो
कँगूरा
काट
डाला
पथ
में
रोड़ा
डाल
थी
पर
पेड़
पूरा
काट
डाला
Aatish Indori
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आजकल
हिचकियाँ
नहीं
आती
इसलिए
चिट्ठियाँ
नहीं
आती
जब
से
पंखे
उतार
फेंके
हैं
स्टूल
और
रस्सियाँ
नहीं
आती
हम
तो
फ़ौरन
हिसाब
करते
हैं
इसलिए
फब्तियाँ
नहीं
आती
राह
पुल
ने
बहुत
कठिन
कर
दी
तट
पे
अब
कश्तियाँ
नहीं
आती
सबके
कमरे
अलग-अलग
हैं
अब
इसलिए
सिसकियाँ
नहीं
आती
इसलिए
गुल
उदास
बैठे
हैं
देखने
तितलियाँ
नहीं
आती
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Aatish Indori
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मेरे
पूछे
सवाल
करती
हो
ज़िंदगी
तुम
कमाल
करती
हो
यार
इन
में
उलझ
गया
हूँ
मैं
इतने
सीधे
सवाल
करती
हो
बेवफ़ाई
दी
है
वफ़ा
के
साथ
मेरा
कितना
ख़याल
करती
हो
इक
वही
रात
तो
सुनहरी
है
जिसका
तुम
जाँ
मलाल
करती
हो
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Aatish Indori
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बड़े
भाग्यशाली
हैं
जिनकी
कलाई
पे
राखी
बँधी
है
चुनिंदा
ही
ऐसे
हैं
जिनके
सरों
पे
ये
पगड़ी
बँधी
है
Aatish Indori
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