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Aatish Indori
wajh kya hai jo kiya tumne khasaara dekhta hooñ
wajh kya hai jo kiya tumne khasaara dekhta hooñ | वज्ह क्या है जो किया तुमने ख़सारा देखता हूँ
- Aatish Indori
वज्ह
क्या
है
जो
किया
तुमने
ख़सारा
देखता
हूँ
इसलिए
पति
को
तेरे
तुम
सेे
ज़ियादा
देखता
हूँ
- Aatish Indori
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ख़ुद
चलो
रास्ता
नहीं
चलता
इश्क़
में
पैंतरा
नहीं
चलता
जिसको
जाना
है
वो
तो
जाएगा
इश्क़
का
वास्ता
नहीं
चलता
देखिए
इश्क़
एक
जंगल
है
रास्तों
का
पता
नहीं
चलता
एक
लम्बा
समय
गुज़रने
दो
चार
दिन
में
पता
नहीं
चलता
गाँव
को
अब
महानगर
समझो
हादसों
का
पता
नहीं
चलता
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हमें
इक
रंग
की
तस्वीर
पहना
दी
कहा
कंगन
है
और
ज़ंजीर
पहना
दी
बताया
यह
था
की
जन्नत
में
भेजेंगे
किसी
आतंकी
की
तक़दीर
पहना
दी
तुम्हारा
काम
है
ख़ुश्बू
को
फैलाना
लुभाया
यूँँ
था
पर
शमशीर
पहना
दी
हमें
ग़म-ख़्वार
भी
ऐसा
मिला
आतिश
सुना
कर
दर्द
ख़ुद
की
पीर
पहना
दी
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टूटी
कश्ती
में
बसेरा
नहीं
डाला
जाता
हर
किसी
पेड़
पे
झूला
नहीं
डाला
जाता
हाज़
में
के
लिए
उपयोग
भले
होता
है
घर
की
बुनियाद
में
मट्ठा
नहीं
डाला
जाता
चाहता
तो
हूँ
मगर
डोल
भरूँ
मैं
कैसे
हो
कुआँ
सूखा
तो
रस्सा
नहीं
डाला
जाता
आपने
चीज़
की
सूरत
ही
बदल
के
रख
दी
इतना
भी
स्वर्ण
में
ताँबा
नहीं
डाला
जाता
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बात
तेरी
नहीं
समझ
सकता
चाह
कर
भी
नहीं
समझ
सकता
दूसरा
चुन
लिया
हो
जिसने
यार
बदहवा
सेी
नहीं
समझ
सकता
मुँह
में
ढेला
नमक
का
हो
जिसके
बात
मीठी
नहीं
समझ
सकता
रहता
हो
जो
तवायफ़ों
के
बीच
वो
कहानी
नहीं
समझ
सकता
आशिक़ी-वाशिक़ी
की
बातों
को
इक
शिकारी
नहीं
समझ
सकता
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Aatish Indori
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तेरी
हद
से
मैं
बहुत
दूर
निकल
आया
हूँ
मैं
तो
इंदौर
से
कन्नूर
निकल
आया
हूँ
Aatish Indori
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