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Aatish Indori
tooti kashtii men basera nahin daala jaata
tooti kashtii men basera nahin daala jaata | टूटी कश्ती में बसेरा नहीं डाला जाता
- Aatish Indori
टूटी
कश्ती
में
बसेरा
नहीं
डाला
जाता
हर
किसी
पेड़
पे
झूला
नहीं
डाला
जाता
हाज़
में
के
लिए
उपयोग
भले
होता
है
घर
की
बुनियाद
में
मट्ठा
नहीं
डाला
जाता
चाहता
तो
हूँ
मगर
डोल
भरूँ
मैं
कैसे
हो
कुआँ
सूखा
तो
रस्सा
नहीं
डाला
जाता
आपने
चीज़
की
सूरत
ही
बदल
के
रख
दी
इतना
भी
स्वर्ण
में
ताँबा
नहीं
डाला
जाता
- Aatish Indori
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हम
लोग
चूंकि
दश्त
के
पाले
हुए
हैं
सो
ख़्वाबों
में
चाहे
झील
हों,
आँखों
में
पेड़
हैं
Siddharth Saaz
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परिंद
क्यूँँ
मिरी
शाख़ों
से
ख़ौफ़
खाते
हैं
कि
इक
दरख़्त
हूँ
और
साया-दार
मैं
भी
हूँ
Asad Badayuni
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खड़े
होकर
कहा
ये
आइने
के
रु-बा-रु
मैंने
शजर
तुमको
कहीं
मिल
जाए
मुझको
इत्तिला
करना
Shajar Abbas
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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पेड़
मुझे
हसरत
से
देखा
करते
थे
मैं
जंगल
में
पानी
लाया
करता
था
Tehzeeb Hafi
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मुनफ़रिद
ख़ुशबू
है
इस
शजर
की
ऐसा
लगता
है
उसने
छुआ
हो
Shadab khan
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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पेड़
का
दुख
तो
कोई
पूछने
वाला
ही
न
था
अपनी
ही
आग
में
जलता
हुआ
साया
देखा
Jameel Malik
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पेड़
के
काटने
वालों
को
ये
मालूम
तो
था
जिस्म
जल
जाएँगे
जब
सर
पे
न
साया
होगा
Kaifi Azmi
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उड़
गए
सारे
परिंदे
मौसमों
की
चाह
में
इंतिज़ार
उन
का
मगर
बूढे
शजर
करते
रहे
Ambreen Haseeb Ambar
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अनकहा
जो
रह
गया
है
वो
समझना
आँख
से
जो
बह
गया
है
वो
समझना
यूँँ
तो
वो
सुन
के
सफ़ाई
दे
रहा
है
बोले
बिन
जो
कह
गया
है
वो
समझना
दे
रहा
हूँ
मैं
मुआफ़ी
तुमको
लेकिन
जो
भरोसा
ढह
गया
है
वो
समझना
हाथ
का
मैं
पोर
छठवाँ
छू
रहा
हूँ
दर्द
कितना
रह
गया
है
वो
समझना
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Aatish Indori
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पीठ
पीछे
बुरा
नहीं
कहता
बरमला
बे-वफ़ा
नहीं
कहता
तुम
जुदा
पूरे
हो
नहीं
पाए
इस
लिए
मैं
ख़ुदा
नहीं
कहता
यह
पता
आज
भी
उसी
का
है
ख़ुद
को
मैं
बे-पता
नहीं
कहता
दोस्त
हो
कह
के
टाल
देता
है
इस
तरीक़े
से
क्या
नहीं
कहता
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Aatish Indori
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जाने
कैसे
कैसे
लोग
ये
महफ़िल
में
आ
जाते
हैं
पीना
वीना
तो
है
नहीं
चखना
लेकिन
खा
जाते
हैं
Aatish Indori
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माँ
के
रहने
से
ही
पत्थर
पे
असर
होता
है
झोपड़ी
हो
या
क़िला
तब
कहीं
घर
होता
है
तरबतर
कोई
दु'आओं
से
अगर
होता
है
हर
किसी
के
लिए
वो
शख़्स
शजर
होता
है
तब्सिरा
फूल
नहीं
करता
कभी
ख़ुश्बू
का
इश्क़
ऐलान
नहीं
करता
अगर
होता
है
गुल
खिला
होता
तो
फिर
वाह
निकलना
तय
थी
वाह
तो
मिलती
ही
है
शे'र
अगर
होता
है
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Aatish Indori
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घर
के
घर
में
लड़ाई
क्यूँँ
करना
ठीक
है
पाँच
गाँव
देते
हैं
Aatish Indori
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