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Aatish Indori
ankaha jo rah gaya hai vo samajhna
ankaha jo rah gaya hai vo samajhna | अनकहा जो रह गया है वो समझना
- Aatish Indori
अनकहा
जो
रह
गया
है
वो
समझना
आँख
से
जो
बह
गया
है
वो
समझना
यूँँ
तो
वो
सुन
के
सफ़ाई
दे
रहा
है
बोले
बिन
जो
कह
गया
है
वो
समझना
दे
रहा
हूँ
मैं
मुआफ़ी
तुमको
लेकिन
जो
भरोसा
ढह
गया
है
वो
समझना
हाथ
का
मैं
पोर
छठवाँ
छू
रहा
हूँ
दर्द
कितना
रह
गया
है
वो
समझना
- Aatish Indori
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अब
ये
भी
नहीं
ठीक
कि
हर
दर्द
मिटा
दें
कुछ
दर्द
कलेजे
से
लगाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
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बातें
करो
तो
बोलती
है
बोलते
हो
तुम
बहुत
उसने
किनारे
पे
से
लहरें
देखी
गहराई
नहीं
100rav
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तन्हा
ही
सही
लड़
तो
रही
है
वो
अकेली
बस
थक
के
गिरी
है
अभी
हारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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इश्क़
में
तेरे
गँवा
दी
ये
जवानी
जानेमन
हो
गई
दिलचस्प
अपनी
भी
कहानी
जानेमन
Tanoj Dadhich
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बस
ये
हुआ
कि
उस
ने
तकल्लुफ़
से
बात
की
और
हम
ने
रोते
रोते
दुपट्टे
भिगो
लिए
Parveen Shakir
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खड़ा
हूँ
आज
भी
रोटी
के
चार
हर्फ़
लिए
सवाल
ये
है
किताबों
ने
क्या
दिया
मुझ
को
Nazeer Baaqri
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आख़िर
में
यूँँ
हुआ
कि
मिरी
मात
हो
गई
मैं
उसके
साथ
थी
जो
ज़माने
के
साथ
था
Parul Singh "Noor"
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मैं
उसे
वो
मुझको
समझाता
रहा
पर
त'अल्लुक़
फिर
भी
मुरझाता
रहा
Madan Mohan Danish
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यारो
कुछ
तो
ज़िक्र
करो
तुम
उस
की
क़यामत
बाँहों
का
वो
जो
सिमटते
होंगे
उन
में
वो
तो
मर
जाते
होंगे
Jaun Elia
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करी
जो
बात
तो
रिश्ता
निकल
आया
सर-ए-राह
अजनबी
अपना
निकल
आया
दुआएँ
दिल
से
माँगी
तो
असर
देखो
समुंदर
से
मेरा
दरिया
निकल
आया
बची
थी
दूरी
जब
दो-चार
क़दमों
की
हमारे
बीच
में
सहरा
निकल
आया
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Aatish Indori
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होश
हो
तो
ये
बच
निकलता
है
पीने
के
बाद
सच
निकलता
है
Aatish Indori
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नंबर
बदला
घर
बदला
दफ़्तर
बदला
उसने
ख़ुद
को
गिरगिट
से
बढ़-कर
बदला
पहले
तो
उसने
मुझको
जी-भर
बदला
फिर
उसने
मन
बदला
और
दिलबर
बदला
उसने
दीवारें
बदली
छप्पर
बदला
मैं
तो
ध्यान
में
उतरा
और
अंबर
बदला
मंज़िल
मैंने
समझी
उसने
मक़ाम
बस
अगले
सफ़र
पे
निकला
तो
रहबर
बदला
अवसाद
से
तू
ही
बाहर
ला
सकता
है
तेरी
इक
समझाइश
ने
मंज़र
बदला
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Aatish Indori
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बेवफ़ाई
तो
दी
ही
जुदाई
भी
दी
जिस्म
चीरा
तो
चीरा
ख़लाई
भी
दी
दर्द
के
साथ
उसने
दवाई
भी
दी
बे-वफ़ा
क्यूँँ
हुआ
यह
सफ़ाई
भी
दी
सिर्फ़
उसने
जुदाई
दी
है
यूँँ
न
था
भूलने
की
उसे
रहनुमाई
भी
दी
उसने
खोला
नहीं
पर
पता
था
मुझे
उस
वफ़ादार
ने
बेवफ़ाई
भी
दी
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Aatish Indori
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दिल
चलो
माना
यार
टूटेगा
पर
बता
कितनी
बार
टूटेगा
इसलिए
जिस्म
को
नहीं
छूता
इश्क़
वाला
क़रार
टूटेगा
याद
कड़वी
चबा
रहा
हूँ
मैं
इस
सेे
शायद
बुख़ार
टूटेगा
ढेर
सारा
ख़रीद
लाया
हूँ
अब
तो
बाज़ार
यार
टूटेगा
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Aatish Indori
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