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Aatish Indori
ga.e saal ka isliye shukriya hai
ga.e saal ka isliye shukriya hai | गए साल का इसलिए शुक्रिया है
- Aatish Indori
गए
साल
का
इसलिए
शुक्रिया
है
नया
साल
लाया
नया
ख़्वाब
लाया
- Aatish Indori
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उम्र
कम
पड़
जायेगी
हर
ख़्वाब
गर
पूरा
हुआ
और
गर
पूरा
न
हो
तो
काटती
है
ज़िंदगी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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गुज़र
रहा
हूँ
किसी
ख़्वाब
के
इलाक़े
से
ज़मीं
समेटे
हुए
आसमाँ
उठाए
हुए
Aziz Nabeel
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बढ़
के
इम्कान
से
नुक़्सान
उठाए
हुए
हैं
हम
मुहब्बत
में
बहुत
नाम
कमाए
हुए
हैं
मेरे
मौला
मुझे
ता'बीर
की
दौलत
दे
दे
मैंने
इक
शख़्स
को
कुछ
ख़्वाब
दिखाए
हुए
हैं
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Ejaz Tawakkal Khan
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ख़्वाब
इतना
भी
हसीं
मत
देखो
नींद
टूटे
तो
न
ये
शब
गुज़रे
anupam shah
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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मेरे
भी
दिल
में
राख
उड़ती
है
तेरे
भी
ख़्वाब
इस
असर
में
हैं
Nusrat Zehra
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ये
ज़रूरी
है
कि
आँखों
का
भरम
क़ाएम
रहे
नींद
रक्खो
या
न
रक्खो
ख़्वाब
मेयारी
रखो
Rahat Indori
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ये
आरज़ू
भी
बड़ी
चीज़
है
मगर
हमदम
विसाल-ए-यार
फ़क़त
आरज़ू
की
बात
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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तूने
देखी
है
वो
पेशानी
वो
रुख़्सार
वो
होंठ
ज़िंदगी
जिनके
तसव्वुर
में
लुटा
दी
हमने
तुझपे
उठी
हैं
वो
खोई
हुई
साहिर
आँखें
तुझको
मालूम
है
क्यूँ
उम्र
गंवा
दी
हमने
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Faiz Ahmad Faiz
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ऐ
शौक़-ए-नज़ारा
क्या
कहिए
नज़रों
में
कोई
सूरत
ही
नहीं
ऐ
ज़ौक़-ए-तसव्वुर
क्या
कीजे
हम
सूरत-ए-जानाँ
भूल
गए
Asrar Ul Haq Majaz
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कैसी
बीती
रात
कहने
की
नहीं
क्या
हुई
है
बात
कहने
की
नहीं
Aatish Indori
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सब्र
की
सीमा
को
यूँँ
परखा
गया
था
वो
विरोधी
की
तरह
मुझ
से
मिला
था
दी
मुहब्बत
तो
मुहब्बत
ही
मुहब्बत
अब
मुसलसल
बेवफ़ाई
दे
रहा
था
छोड़ने
की
वज्ह
यह
बिल्कुल
नहीं
थी
अस्ल
में
दीवानगी
से
वो
ख़फ़ा
था
बे-वफ़ाई
की
गवाही
ख़ुद
की
उसने
कुछ
ज़ियादा
ही
सफ़ाई
दे
रहा
था
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Aatish Indori
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दिल
में
मेरा
ख़याल
बाक़ी
है
माने
कुछ
तो
मलाल
बाक़ी
है
अभी
होना
धमाल
बाक़ी
है
क्यूँँकि
मेरा
कमाल
बाक़ी
है
बढ़िया
वाली
नहीं
पिलाई
क्या
दिल
में
उसका
ख़याल
बाक़ी
है
थोड़ा
और
सब्र
कर
लो
ऐ
यमराज
ख़र्च
करने
को
माल
बाक़ी
है
कभी
मत
पूछना
समुंदर
से
उस
में
कितना
हुलाल
बाक़ी
है
थोड़ा
सा
और
गुलाल
ले
आओ
अभी
रँगने
को
भाल
बाक़ी
है
आतिश
इंदौरी
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हाथ
को
छूते
हुए
एक
गिलहरी
गुज़री
मुद्दतों
बाद
कोई
याद
पुरानी
गुज़री
छोटी
सी
बात
पे
बच्चों
ने
कहा
मर
जाओ
माँ
हँसी
ख़ूब
भले
दिल
से
सुनामी
गुज़री
कोई
गाली
दे
भले
मैं
उसे
गुल
देता
हूँ
ज़िंदगी
अच्छे
से
इस
वजह
से
मेरी
गुज़री
यूँँ
तो
कहने
को
मेरा
नाम
पता
पूछा
था
दूसरे
पल
में
तो
गर्दन
से
कटारी
गुज़री
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Aatish Indori
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ज़िंदगानी
में
उजाला
ही
नहीं
रात-दिन
वाला
तमाशा
ही
नहीं
रात
जैसे
दिन
बिताए
हमने
सब
कोई
दिन
अच्छे
से
बीता
ही
नहीं
इतना
चिल्लाए
कि
गूँगे
हो
गए
आप
कहते
हैं
पुकारा
ही
नहीं
सच
तो
लगती
हैं
तेरी
बातें
मगर
ज़िंदगी
तुझ
पे
भरोसा
ही
नहीं
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Aatish Indori
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