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Aatish Indori
sabr ki seema ko yuñ parkha gaya tha
sabr ki seema ko yuñ parkha gaya tha | सब्र की सीमा को यूँँ परखा गया था
- Aatish Indori
सब्र
की
सीमा
को
यूँँ
परखा
गया
था
वो
विरोधी
की
तरह
मुझ
से
मिला
था
दी
मुहब्बत
तो
मुहब्बत
ही
मुहब्बत
अब
मुसलसल
बेवफ़ाई
दे
रहा
था
छोड़ने
की
वज्ह
यह
बिल्कुल
नहीं
थी
अस्ल
में
दीवानगी
से
वो
ख़फ़ा
था
बे-वफ़ाई
की
गवाही
ख़ुद
की
उसने
कुछ
ज़ियादा
ही
सफ़ाई
दे
रहा
था
- Aatish Indori
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बेवफ़ाई
ने
तिरी
मुझको
दिया
है
ये
हुनर
बस
यार
दुनिया
में
कहाँ
हर
भाग्य
में
ये
फ़न
लिखा
है
Harsh saxena
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मिन्नतें
करता
था
रुक
जाओ
मेरा
कोई
नहीं
मेरे
रोके
से
मगर
कौन
रुका
कोई
नहीं
बेवफ़ाई
को
बड़ा
जुर्म
बताने
वाले
याद
है
तूने
भी
चल
छोड़
हटा
कोई
नहीं
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Khan Janbaz
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हम
से
क्या
हो
सका
मोहब्बत
में
ख़ैर
तुम
ने
तो
बे-वफ़ाई
की
Firaq Gorakhpuri
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चला
था
ज़िक्र
ज़माने
की
बे-वफ़ाई
का
सो
आ
गया
है
तुम्हारा
ख़याल
वैसे
ही
Ahmad Faraz
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इश्क़
में
धोखा
खाने
वाले
बिल्कुल
भी
मायूस
न
हो
इस
रस्ते
में
थोड़ा
आगे
मयख़ाना
भी
आता
है
Darpan
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तुम्हारी
ख़ानदानी
रस्म
रस्म-ए-बेवफ़ाई
है
हमीं
पागल
थे
जो
तुम
पर
भरोसा
कर
लिया
हमने
Shajar Abbas
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उसकी
टीस
नहीं
जाती
है
सारी
उम्र
पहला
धोखा
पहला
धोखा
होता
है
Shariq Kaifi
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चमचमाती
कार
में
उसकी
बिदाई
हो
गई
पर
यक़ीन
आता
नहीं
है
बेवफ़ाई
हो
गई
आख़री
चोटी
से
गिरकर
हम
मरे
हैं
इश्क़
की
हम
समझते
थे
हिमालय
की
चढ़ाई
हो
गई
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Tanoj Dadhich
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मैं
तेरे
बाद
कोई
तेरे
जैसा
ढूँढता
हूँ
जो
बे-वफ़ाई
करे
और
बे-वफ़ा
न
लगे
Abbas Tabish
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तू
इस
तरह
से
मिरे
साथ
बे-वफ़ाई
कर
कि
तेरे
बाद
मुझे
कोई
बे-वफ़ा
न
लगे
Qaisar-ul-Jafri
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पहले
डर
की
दहलीज़
पार
करना
फिर
सागर
की
दहलीज़
पार
करना
Aatish Indori
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पीठ
पीछे
बुरा
नहीं
कहता
बरमला
बे-वफ़ा
नहीं
कहता
तुम
जुदा
पूरे
हो
नहीं
पाए
इस
लिए
मैं
ख़ुदा
नहीं
कहता
यह
पता
आज
भी
उसी
का
है
ख़ुद
को
मैं
बे-पता
नहीं
कहता
दोस्त
हो
कह
के
टाल
देता
है
इस
तरीक़े
से
क्या
नहीं
कहता
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जिस
सेे
कोई
जान
न
पहचान
साथ
उसके
क्यूँँ
आबाद
हुआ
जाए
इस
सेे
अच्छा
है
कि
मुहब्बत
कर
ली
जाए
और
बर्बाद
हुआ
जाए
Aatish Indori
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अपना
जब
सायबान
बेच
आए
आप
फिर
आसमान
बेच
आए
कौड़ियाँ
क़ीमती
लगी
होंगी
तभी
हीरों
की
खान
बेच
आए
कतरे
पर
और
यह
हवा
दे
दी
कि
परिंदे
उड़ान
बेच
आए
वास्ते
हक़
के
भी
नहीं
उठती
डर
को
जब
से
ज़बान
बेच
आए
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Aatish Indori
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ज़िंदगानी
में
उजाला
ही
नहीं
रात-दिन
वाला
तमाशा
ही
नहीं
रात
जैसे
दिन
बिताए
हमने
सब
कोई
दिन
अच्छे
से
बीता
ही
नहीं
इतना
चिल्लाए
कि
गूँगे
हो
गए
आप
कहते
हैं
पुकारा
ही
नहीं
सच
तो
लगती
हैं
तेरी
बातें
मगर
ज़िंदगी
तुझ
पे
भरोसा
ही
नहीं
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Aatish Indori
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