hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Aatish Indori
zindagaani men ujaala hi nahin
zindagaani men ujaala hi nahin | ज़िंदगानी में उजाला ही नहीं
- Aatish Indori
ज़िंदगानी
में
उजाला
ही
नहीं
रात-दिन
वाला
तमाशा
ही
नहीं
रात
जैसे
दिन
बिताए
हमने
सब
कोई
दिन
अच्छे
से
बीता
ही
नहीं
इतना
चिल्लाए
कि
गूँगे
हो
गए
आप
कहते
हैं
पुकारा
ही
नहीं
सच
तो
लगती
हैं
तेरी
बातें
मगर
ज़िंदगी
तुझ
पे
भरोसा
ही
नहीं
- Aatish Indori
Download Ghazal Image
यूँँ
नहीं
है
यहीं
नहीं
लगता
मेरा
दिल
अब
कहीं
नहीं
लगता
Aatish Indori
Send
Download Image
5 Likes
शहर
दर
शहर
ख़ाक
छानी
है
इश्क़
धोका
है
बात
जानी
है
Aatish Indori
Send
Download Image
1 Like
मेरी
पहचान
इतनी
सी
है
बस
माँ
की
आँखों
का
लाड़ला
हूँ
मैं
Aatish Indori
Send
Download Image
2 Likes
जानता
था
कि
तुम
दग़ा
दोगी
क्यूँँकि
तुम
कहती
थी
वफ़ा
दोगी
आपकी
तरह
ही
हसीन
है
वो
अपना
काजल
उसे
लगा
दोगी
एक
झटके
मैं
झुक
गई
तुम
तो
और
तुम
मुझको
हौसला
दोगी
उम्र
भर
आपको
दु'आ
दूँगा
अच्छे
ग़म-ख़्वार
का
पता
दोगी
जिस्म
तक
इसलिए
नहीं
पहुँचा
ज़िंदगी
भर
मुझे
दु'आ
दोगी
Read Full
Aatish Indori
Download Image
1 Like
करी
जो
बात
तो
रिश्ता
निकल
आया
सर-ए-राह
अजनबी
अपना
निकल
आया
दुआएँ
दिल
से
माँगी
तो
असर
देखो
समुंदर
से
मेरा
दरिया
निकल
आया
बची
थी
दूरी
जब
दो-चार
क़दमों
की
हमारे
बीच
में
सहरा
निकल
आया
Read Full
Aatish Indori
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Shikwa Shayari
Lab Shayari
Friendship Shayari
Visaal Shayari
Gulaab Shayari