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Aatish Indori
dil men meraa khyaal baqi hai
dil men meraa khyaal baqi hai | दिल में मेरा ख़याल बाक़ी है
- Aatish Indori
दिल
में
मेरा
ख़याल
बाक़ी
है
माने
कुछ
तो
मलाल
बाक़ी
है
अभी
होना
धमाल
बाक़ी
है
क्यूँँकि
मेरा
कमाल
बाक़ी
है
बढ़िया
वाली
नहीं
पिलाई
क्या
दिल
में
उसका
ख़याल
बाक़ी
है
थोड़ा
और
सब्र
कर
लो
ऐ
यमराज
ख़र्च
करने
को
माल
बाक़ी
है
कभी
मत
पूछना
समुंदर
से
उस
में
कितना
हुलाल
बाक़ी
है
थोड़ा
सा
और
गुलाल
ले
आओ
अभी
रँगने
को
भाल
बाक़ी
है
आतिश
इंदौरी
- Aatish Indori
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सब्र
मेरा
फ़िक्र
में
है
रोज़-ओ-शब
ये
सोचता
है
दूध
में
दोनों
अँगूठी
ढूँढते
कैसे
लगेंगे
Raj
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मेरे
होंठों
के
सब्र
से
पूछो
उसके
हाथों
से
गाल
तक
का
सफ़र
Mehshar Afridi
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मैं
क्या
कहूँ
के
मुझे
सब्र
क्यूँँ
नहीं
आता
मैं
क्या
करूँँ
के
तुझे
देखने
की
आदत
है
Ahmad Faraz
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वो
मुझ
को
छोड़
के
जिस
आदमी
के
पास
गया
बराबरी
का
भी
होता
तो
सब्र
आ
जाता
Parveen Shakir
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सहने
वाले
को
गर
सब्र
आ
जाए
तो
फिर
समझो
कहने
वालों
की
औक़ात
फ़क़त
दो
कौड़ी
की
है
A R Sahil "Aleeg"
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जिस
दिन
तुम्हारे
ख़त
का
मुझे
इंतिज़ार
था
उस
दिन
तमाम
पंछी
कबूतर
लगे
मुझे
Ali Rumi
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रात
का
इंतिज़ार
कौन
करे
आज
कल
दिन
में
क्या
नहीं
होता
Bashir Badr
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शाख़-ए-उम्मीद
से
कड़वा
भी
उतर
सकता
हूँ
रोज़
ये
बात
मुझे
सब्र
का
फल
कहता
है
Rakib Mukhtar
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तमाम
जिस्म
को
आँखें
बना
के
राह
तको
तमाम
खेल
मुहब्बत
में
इंतिज़ार
का
है
Munawwar Rana
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हर
कोई
सब्र
की
तलक़ीन
किया
करता
है
पर
कोई
ये
तो
बताए
कि
करूँँ
मैं,
कैसे?
Afzal Ali Afzal
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यार
तू
बेवजह
ही
मुझ
सेे
ख़फ़ा
है
बेवफ़ाई
आजकल
रस्म-ए-वफ़ा
है
Aatish Indori
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थोड़े-मोड़े
थोड़ी
हम
तो
बेहद
अजीब
थे
रस्ते
तब
बदले
जब
हम
मंज़िल
के
क़रीब
थे
किस
पर
मढ़ते
दोष
अपनी
बर्बादी
का
'आतिश'
दूजा
कोई
न
था
हम
ख़ुद
ही
अपने
रक़ीब
थे
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Aatish Indori
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ख़यालों
के
घने
जंजाल
में
ख़ुद
फँस
गया
हूँ
बचाओ
दोस्तों
दलदल
में
गहरे
धँस
गया
हूँ
Aatish Indori
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रूम
पर
आप
हैं
और
सब्र
हमारा
देखो
बंद
खिड़की
नहीं
की
और
न
ही
पर्दा
खींचा
Aatish Indori
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काम
जान-ए-जाँ
को
जो
आता
है
वो
भी
करती
है
मैं
वफ़ा
करता
हूँ
तो
वो
बेवफ़ाई
करती
है
Aatish Indori
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