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Rakib Mukhtar
shaakh-e-ummeed se karwa bhi utar saka hooñ
shaakh-e-ummeed se karwa bhi utar saka hooñ | शाख़-ए-उम्मीद से कड़वा भी उतर सकता हूँ
- Rakib Mukhtar
शाख़-ए-उम्मीद
से
कड़वा
भी
उतर
सकता
हूँ
रोज़
ये
बात
मुझे
सब्र
का
फल
कहता
है
- Rakib Mukhtar
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हासिल
न
कर
पाया
तुझे
मैं
मिन्नतों
के
बाद
भी
उम्मीद
सेंटा
से
लगाना
लाज़मी
भी
है
मिरा
Harsh saxena
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किस
से
उम्मीद
करें
कोई
इलाज-ए-दिल
की
चारा-गर
भी
तो
बहुत
दर्द
का
मारा
निकला
Lutf Ur Rahman
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इस
उम्मीद
पे
रोज़
चराग़
जलाते
हैं
आने
वाले
बरसों
ब'अद
भी
आते
हैं
Zehra Nigaah
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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न
कोई
वा'दा
न
कोई
यक़ीं
न
कोई
उमीद
मगर
हमें
तो
तिरा
इंतिज़ार
करना
था
Firaq Gorakhpuri
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चलो
माना
कि
रोना
मसअले
का
हल
नहीं
लेकिन
करे
भी
क्या
कोई
जब
ख़त्म
हर
उम्मीद
हो
जाए
Bhaskar Shukla
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उठते
नहीं
हैं
अब
तो
दु'आ
के
लिए
भी
हाथ
किस
दर्जा
ना-उमीद
हैं
परवरदिगार
से
Akhtar Shirani
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किसी
पे
करना
नहीं
ए'तिबार
मेरी
तरह
लुटा
के
बैठोगे
सब्र-ओ-क़रार
मेरी
तरह
Fareed Parbati
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वहशत
के
कारखाने
से
ताज़ा
ग़ज़ल
निकाल
ऐ
सब्र
के
दरख़्त
मेरा
मीठा
फल
निकाल
Ammar Iqbal
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किसी
से
कोई
भी
उम्मीद
रखना
छोड़
कर
देखो
तो
ये
रिश्ते
निभाना
किस
क़दर
आसान
हो
जाए
Waseem Barelvi
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वो
इतना
ढेर
हसीं
था
कि
हम
पे
वाजिब
है
तमाम
उम्र
बिछड़ने
का
ग़म
किया
जाए
Rakib Mukhtar
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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ये
सानेहा
भी
हुआ
है
तेरी
ख़ुदाई
में
तलाक़
दी
गई
दुल्हन
को
मुँह
दिखाई
में
ये
और
बात
कि
हम
माँगते
नहीं
वर्ना
हमारा
हिस्सा
है
दुनिया
की
पाई
पाई
में
शदीद
ग़ुस्से
में
सतरंगी
चूड़ियों
के
साथ
हमारा
दिल
भी
है
टूटा
तेरी
कलाई
में
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Rakib Mukhtar
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ये
रिज़्क़-ए-अश्क
फ़राहम
बहम
किया
जाए
हमारी
आँख
पे
रहम-ओ-करम
किया
जाए
मुरीदनी
के
दुपट्टे
की
सम्त
लपका
था
जनाब-ए-पीर
का
बाज़ू
क़लम
किया
जाए
वो
इतना
ढ़ेर
हसीं
था
कि
हम
पे
वाजिब
है
तमाम
उम्र
बिछड़ने
का
ग़म
किया
जाए
ज़मीं
को
अर्श-ए-मुअल्ला
तलक
रिसाई
मिले
फ़लक
को
खींच
के
मिट्टी
में
ज़म
किया
जाए
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Rakib Mukhtar
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दिलासा
देते
हुए
लोग
क्या
समझ
पाते
हम
एक
शख़्स
नहीं
काएनात
हारे
थे
Rakib Mukhtar
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